Tuesday, 23 November 2010

अस्तित्व खो रही टिहरी रियासत की धरोहरें



कभी टिहरी रियासत की शान समझी जाने वाली धरोहरें अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। गढ़वाल के इतिहास के इन झरोखों पर अब उपेक्षा की परत चढ़ती जा रही है। परगनों के पंचायत स्थलों से लेकर मंदिरों तक को ना तो पुरातत्व विभाग ने अपनाया है और ना ही पर्यटन विभाग इनमें छिपी संभावनाओं को समझ सका है।
 
उत्तरकाशी जिले में टिहरी रियासत के समय की धरोहरें बिखरी पड़ी हैं। इनमें राजगढ़ी स्थित राजा की कोठी प्रमुख है। राजशाही के दौरान रवांई परगने की बैठकें यहीं हुआ करती थीं। हवेलीनुमा इस इमारत की विशेष बनावट के चलते अपना अलग आकर्षण रहा, लेकिन अब यह पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी है।


उपला टकनौर व बाड़ाहाट परगने में भी पंचायतें होती थी और राजा या उनके प्रतिनिधि उनमें शामिल हुआ करते थे। उपला टकनौर की पंचायत हर्षिल में हुआ करती थी। लेकिन अब ये पंचायत स्थल भी अपना अस्तित्व खो चुके हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री मंदिर सहित जिले के सभी पौराणिक मंदिरों भी टिहरी रियासत के संरक्षण में थे।

जिनमें उत्तरकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर, भैरव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर, कालेश्वर मंदिर गंगनानी स्थित त्रिवेणी संगम आदि पौराणिक धरोहरें शामिल हैं। ये सभी रियासत की टेंपल बोर्ड के संरक्षण में है जो अभी भी अस्तित्व में हैं। लेकिन दोनों धामों को छोड़कर अन्य सभी धरोहरों के संरक्षण की दिशा में कोई कोशिश नहीं की गई। इन धरोहरों की देखरेख के लिए जो लोग तैनात किए गए थे। वे ही अपने स्रोतों से इनका रखरखाव करते रहे।

टेंपल बोर्ड की ओर से इस काम के लिये मिलने वाली धनराशि ऊंट के मुंह में जीरे से भी कम साबित होती है। जिले में इन पौराणिक धरोहरों पर पुरातत्व विभाग की भी नजरे इनायत नहीं हुई है। वहीं पर्यटकों के लिए आकर्षण की संभावनाएं समेटने के बावजूद पर्यटन विभाग अपनी कार्ययोजना में इन्हें शामिल नहीं कर सका है।


इनमें से कुछ तो इतनी जर्जर हो गई हैं कि आने वाले दिनों में उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इतिहासकार उमा रमण सेमवाल बताते हैं कि रियासत काल में धरोहरों को इस तरह से तैयार किया गया था कि वे भविष्य में भी उपयोगी साबित हों। अनेक जगहों पर तो इनका उपयोग तो किया गया लेकिन रखरखाव नहीं हो सका इसीलिए ये नष्ट होने की कगार पर पहुंची हैं।

6 comments:

  1. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

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  2. nice post,lekhan jari rakhiyega.shubh kamnaon ke saath..........
    ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

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  3. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| धन्यवाद|

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  5. लेखन के मार्फ़त नव सृजन के लिये बढ़ाई और शुभकामनाएँ!
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    आलेख-"संगठित जनता की एकजुट ताकत
    के आगे झुकना सत्ता की मजबूरी!"
    का अंश.........."या तो हम अत्याचारियों के जुल्म और मनमानी को सहते रहें या समाज के सभी अच्छे, सच्चे, देशभक्त, ईमानदार और न्यायप्रिय-सरकारी कर्मचारी, अफसर तथा आम लोग एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बन जायें।"
    पूरा पढ़ने के लिए :-
    http://baasvoice.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html

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  6. " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप, आपके परिवार तथा इष्टमित्रो को होली की हार्दिक शुभकामना. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

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